M N Dutt
Having finished there Sandhyā prayers and recited incantations he, with Daśānana, went to the northern ocean.
पदच्छेदः
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| संध्याम् | संध्या (२.१) |
| उपासित्वा | उपासित्वा (√उप-आस् + ल्यप्) |
| स्नात्वा | स्नात्वा (√स्ना + क्त्वा) |
| जप्त्वा | जप्त्वा (√जप् + क्त्वा) |
| च | च (अव्ययः) |
| वानरः | वानर (१.१) |
| उत्तरं | उत्तर (२.१) |
| सागरं | सागर (२.१) |
| प्रायाद् | प्रायात् (√प्र-या लङ् प्र.पु. एक.) |
| वहमानो | वहमान (√वह् + शानच्, १.१) |
| दशाननम् | दशानन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | त्र | सं | ध्या | मु | पा | सि | त्वा |
| स्ना | त्वा | ज | प्त्वा | च | वा | न | रः |
| उ | त्त | रं | सा | ग | रं | प्रा | या |
| द्व | ह | मा | नो | द | शा | न | नम् |