पदच्छेदः
| ऊचुः | ऊचुः (√वच् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| प्राञ्जलयो | प्राञ्जलि (१.३) |
| देवा | देव (१.३) |
| दरोदरनिभोदराः | दर–उदर–निभ–उदर (१.३) |
| त्वया | त्वद् (३.१) |
| स्म | स्म (अव्ययः) |
| भगवन् | भगवत् (८.१) |
| सृष्टाः | सृष्ट (√सृज् + क्त, १.३) |
| प्रजानाथ | प्रजानाथ (८.१) |
| चतुर्विधाः | चतुर्विध (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऊ | चुः | प्रा | ञ्ज | ल | यो | दे | वा |
| द | रो | द | र | नि | भो | द | राः |
| त्व | या | स्म | भ | ग | व | न्सृ | ष्टाः |
| प्र | जा | ना | थ | च | तु | र्वि | धाः |