पदच्छेदः
| यथापुराणि | यथा (अव्ययः)–पुर (२.३) |
| ते | तद् (१.३) |
| गत्वा | गत्वा (√गम् + क्त्वा) |
| रत्नानि | रत्न (२.३) |
| विविधानि | विविध (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| रामाय | राम (४.१) |
| प्रियकामार्थम् | प्रिय–काम–अर्थ (२.१) |
| उपहारान्नृपा | उपहार (२.३)–नृप (१.३) |
| ददुः | ददुः (√दा लिट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | था | पु | रा | णि | ते | ग | त्वा |
| र | त्ना | नि | वि | वि | धा | नि | च |
| रा | मा | य | प्रि | य | का | मा | र्थ |
| मु | प | हा | रा | न्नृ | पा | द | दुः |