पदच्छेदः
| माम् | मद् (२.१) |
| आश्रितानि | आश्रित (√आ-श्रि + क्त, २.३) |
| कान्याहुः | क (२.३)–आहुः (√अह् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| पौरजानपदा | पौर–जानपद (१.३) |
| जनाः | जन (१.३) |
| किं | क (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सीतां | सीता (२.१) |
| समाश्रित्य | समाश्रित्य (√समा-श्रि + ल्यप्) |
| भरतं | भरत (२.१) |
| किं | क (२.१) |
| नु | नु (अव्ययः) |
| लक्ष्मणम् | लक्ष्मण (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मा | मा | श्रि | ता | नि | का | न्या | हुः |
| पौ | र | जा | न | प | दा | ज | नाः |
| किं | च | सी | तां | स | मा | श्रि | त्य |
| भ | र | तं | किं | नु | ल | क्ष्म | णम् |