तं तु देशमभिप्रेत्य किंचित्पद्भ्यां महामुनिः ।
अर्घ्यमादाय रुचिरं जाह्नवीतीरमाश्रितः ।
ददर्श राघवस्येष्टां पत्नीं सीतामनाथवत् ॥
तं तु देशमभिप्रेत्य किंचित्पद्भ्यां महामुनिः ।
अर्घ्यमादाय रुचिरं जाह्नवीतीरमाश्रितः ।
ददर्श राघवस्येष्टां पत्नीं सीतामनाथवत् ॥
पदच्छेदः
| तं | तद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| देशम् | देश (२.१) |
| अभिप्रेत्य | अभिप्रेत्य (√अभिप्र-इ + ल्यप्) |
| किंचित् | कश्चित् (२.१) |
| पद्भ्यां | पद् (३.२) |
| महामुनिः | महत्–मुनि (१.१) |
| अर्घ्यम् | अर्घ्य (२.१) |
| आदाय | आदाय (√आ-दा + ल्यप्) |
| रुचिरं | रुचिर (२.१) |
| जाह्नवीतीरम् | जाह्नवी–तीर (२.१) |
| आश्रितः | आश्रित (√आ-श्रि + क्त, १.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| राघवस्येष्टां | राघव (६.१)–इष्ट (२.१) |
| पत्नीं | पत्नी (२.१) |
| सीताम् | सीता (२.१) |
| अनाथवत् | अनाथ–वत् (अव्ययः) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तं | तु | दे | श | म | भि | प्रे | त्य | किं | चि | त्प | द्भ्यां |
| म | हा | मु | निः | अ | र्घ्य | मा | दा | य | रु | चि | रं |
| जा | ह्न | वी | ती | र | मा | श्रि | तः | द | द | र्श | रा |
| घ | व | स्ये | ष्टां | प | त्नीं | सी | ता | म | ना | थ | वत् |