पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| सुमन्त्रस्त्वागम्य | सुमन्त्र (१.१)–तु (अव्ययः)–आगम्य (√आ-गम् + ल्यप्) |
| राघवं | राघव (२.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| एते | एतद् (१.३) |
| निवारिता | निवारित (√नि-वारय् + क्त, १.३) |
| राजन् | राजन् (८.१) |
| द्वारि | द्वार् (७.१) |
| तिष्ठन्ति | तिष्ठन्ति (√स्था लट् प्र.पु. बहु.) |
| तापसाः | तापस (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | सु | म | न्त्र | स्त्वा | ग | म्य |
| रा | घ | वं | वा | क्य | म | ब्र | वीत् |
| ए | ते | नि | वा | रि | ता | रा | ज |
| न्द्वा | रि | ति | ष्ठ | न्ति | ता | प | साः |