तस्य तद्वचनं श्रुत्वा रामः प्रोवाच धर्मवित् ।
प्रवेश्यन्तां महात्मानो भार्गवप्रमुखा द्विजाः ॥
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा रामः प्रोवाच धर्मवित् ।
प्रवेश्यन्तां महात्मानो भार्गवप्रमुखा द्विजाः ॥
पदच्छेदः
| तस्य | तद् (६.१) |
| तद्वचनं | तद् (२.१)–वचन (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| रामः | राम (१.१) |
| प्रोवाच | प्रोवाच (√प्र-वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| धर्मवित् | धर्म–विद् (१.१) |
| प्रवेश्यन्तां | प्रवेश्यन्ताम् (√प्र-वेशय् प्र.पु. बहु.) |
| महात्मानो | महात्मन् (१.३) |
| भार्गवप्रमुखा | भार्गव–प्रमुख (१.३) |
| द्विजाः | द्विज (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्य | त | द्व | च | नं | श्रु | त्वा |
| रा | मः | प्रो | वा | च | ध | र्म | वित् |
| प्र | वे | श्य | न्तां | म | हा | त्मा | नो |
| भा | र्ग | व | प्र | मु | खा | द्वि | जाः |