पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| हत्वा | हत्वा (√हन् + क्त्वा) |
| मधुसुतं | मधु–सुत (२.१) |
| लवणं | लवण (२.१) |
| पापनिश्चयम् | पाप–निश्चय (२.१) |
| राज्यं | राज्य (२.१) |
| प्रशाधि | प्रशाधि (√प्र-शास् लोट् म.पु. ) |
| धर्मेण | धर्म (३.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| यद्यवेक्षसे | यदि (अव्ययः)–अवेक्षसे (√अव-ईक्ष् लट् म.पु. ) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | त्वं | ह | त्वा | म | धु | सु | तं |
| ल | व | णं | पा | प | नि | श्च | यम् |
| रा | ज्यं | प्र | शा | धि | ध | र्मे | ण |
| वा | क्यं | मे | य | द्य | वे | क्ष | से |