M N Dutt
Thus addressed by Raghava Bharata remarked: "I will slay this. Let this task be entrusted to me."
पदच्छेदः
| राघवेणैवम् | राघव (३.१)–एवम् (अव्ययः) |
| उक्तस्तु | उक्त (√वच् + क्त, १.१)–तु (अव्ययः) |
| भरतो | भरत (१.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| अहम् | मद् (१.१) |
| एनं | एनद् (२.१) |
| वधिष्यामि | वधिष्यामि (√वध् लृट् उ.पु. ) |
| ममांशः | मद् (६.१)–अंश (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| विधीयताम् | विधीयताम् (√वि-धा प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| रा | घ | वे | णै | व | मु | क्त | स्तु |
| भ | र | तो | वा | क्य | म | ब्र | वीत् |
| अ | ह | मे | नं | व | धि | ष्या | मि |
| म | मां | शः | स | वि | धी | य | ताम् |