पदच्छेदः
| सृष्टः | सृष्ट (√सृज् + क्त, १.१) |
| शरो | शर (१.१) |
| ऽयं | इदम् (१.१) |
| काकुत्स्थ | काकुत्स्थ (८.१) |
| यदा | यदा (अव्ययः) |
| शेते | शेते (√शी लट् प्र.पु. एक.) |
| महार्णवे | महत्–अर्णव (७.१) |
| स्वयम्भूर् | स्वयम्भु (१.१) |
| अजितो | अजित (१.१) |
| देवो | देव (१.१) |
| यं | यद् (२.१) |
| नापश्यन् | न (अव्ययः)–अपश्यन् (√पश् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| सुरासुराः | सुर–असुर (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सृ | ष्टः | श | रो | ऽयं | का | कु | त्स्थ |
| य | दा | शे | ते | म | हा | र्ण | वे |
| स्व | य | म्भू | र | जि | तो | दे | वो |
| यं | ना | प | श्य | न्सु | रा | सु | राः |