पदच्छेदः
| शासनात् | शासन (५.१) |
| पार्थिवेन्द्रस्य | पार्थिव–इन्द्र (६.१) |
| सूदः | सूद (१.१) |
| संभ्रान्तमानसः | संभ्रान्त (√सम्-भ्रम् + क्त)–मानस (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| रक्षः | रक्षस् (१.१) |
| पुनस्तत्र | पुनर् (अव्ययः)–तत्र (अव्ययः) |
| सूदवेषम् | सूद–वेष (२.१) |
| अथाकरोत् | अथ (अव्ययः)–अकरोत् (√कृ लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शा | स | ना | त्पा | र्थि | वे | न्द्र | स्य |
| सू | दः | सं | भ्रा | न्त | मा | न | सः |
| स | च | र | क्षः | पु | न | स्त | त्र |
| सू | द | वे | ष | म | था | क | रोत् |