पदच्छेदः
| तैर् | तद् (३.३) |
| वध्यमाना | वध्यमान (√वध् + शानच्, १.३) |
| देवाश्च | देव (१.३)–च (अव्ययः) |
| ऋषयश्च | ऋषि (१.३)–च (अव्ययः) |
| तपोधनाः | तपोधन (१.३) |
| भयार्ताः | भय–आर्त (१.३) |
| शरणं | शरण (२.१) |
| जग्मुर् | जग्मुः (√गम् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| देवदेवं | देवदेव (२.१) |
| महेश्वरम् | महेश्वर (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तै | र्व | ध्य | मा | ना | दे | वा | श्च |
| ऋ | ष | य | श्च | त | पो | ध | नाः |
| भ | या | र्ताः | श | र | णं | ज | ग्मु |
| र्दे | व | दे | वं | म | हे | श्व | रम् |