पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| अस्मत्प्रियार्थं | मद्–प्रिय–अर्थ (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| जहि | जहि (√हा लोट् म.पु. ) |
| तान्मधुसूदन | तद् (२.३)–मधुसूदन (८.१) |
| चक्रकृत्तास्यकमलान्निवेदय | चक्र–कृत्त (√कृत् + क्त)–आस्य–कमल (२.३)–निवेदय (√नि-वेदय् लोट् म.पु. ) |
| यमाय | यम (४.१) |
| वै | वै (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | त्व | म | स्म | त्प्रि | या | र्थं | तु |
| ज | हि | ता | न्म | धु | सू | द | न |
| च | क्र | कृ | त्ता | स्य | क | म | ला |
| न्नि | वे | द | य | य | मा | य | वै |