पदच्छेदः
| त्यक्त्वा | त्यक्त्वा (√त्यज् + क्त्वा) |
| लङ्कां | लङ्का (२.१) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| राक्षसा | राक्षस (१.३) |
| बलगर्विताः | बल–गर्वित (१.३) |
| प्रयाता | प्रयाता (√प्र-या लुट् प्र.पु. एक.) |
| देवलोकाय | देव–लोक (४.१) |
| योद्धुं | योद्धुम् (√युध् + तुमुन्) |
| दैवतशत्रवः | दैवत–शत्रु (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्य | क्त्वा | ल | ङ्कां | त | तः | स | र्वे |
| रा | क्ष | सा | ब | ल | ग | र्वि | ताः |
| प्र | या | ता | दे | व | लो | का | य |
| यो | द्धुं | दै | व | त | श | त्र | वः |