पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| शत्रुघ्नं | शत्रुघ्न (२.१) |
| स्थितं | स्थित (√स्था + क्त, २.१) |
| द्वारि | द्वार् (७.१) |
| धृतायुधम् | धृत (√धृ + क्त)–आयुध (२.१) |
| तम् | तद् (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ततो | तत (√तन् + क्त, १.१) |
| रक्षः | रक्षस् (१.१) |
| किम् | क (२.१) |
| अनेन | इदम् (३.१) |
| करिष्यसि | करिष्यसि (√कृ लृट् म.पु. ) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | द | द | र्श | श | त्रु | घ्नं |
| स्थि | तं | द्वा | रि | धृ | ता | यु | धम् |
| त | मु | वा | च | त | तो | र | क्षः |
| कि | म | ने | न | क | रि | ष्य | सि |