M N Dutt
Beholding his own action baffled the Rākşasa again took up many trees and hurled them at Śatrughna, who, with three or four hundred bent arrow, cut them all, one by one, into pieces.
पदच्छेदः
| तद् | तद् (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| विफलं | विफल (२.१) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| राक्षसः | राक्षस (१.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| पादपान् | पादप (२.३) |
| सुबहून् | सु (अव्ययः)–बहु (२.३) |
| गृह्य | गृह्य (√ग्रह् + क्त्वा) |
| शत्रुघ्ने | शत्रुघ्न (७.१) |
| व्यसृजद् | व्यसृजत् (√वि-सृज् लङ् प्र.पु. एक.) |
| बली | बलिन् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | द्दृ | ष्ट्वा | वि | फ | लं | क | र्म |
| रा | क्ष | सः | पु | न | रे | व | तु |
| पा | द | पा | न्सु | ब | हू | न्गृ | ह्य |
| श | त्रु | घ्ने | व्य | सृ | ज | द्ब | ली |