पदच्छेदः
| अन्यथा | अन्यथा (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| फलं | फल (१.१) |
| तुभ्यं | त्वद् (४.१) |
| भवेद् | भवेत् (√भू विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| घोराभिसंहितम् | घोर–अभिसंहित (√अभिसम्-धा + क्त, १.१) |
| क्रोधेन | क्रोध (३.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| पिता | पितृ (१.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| ऽसौ | अदस् (१.१) |
| त्रैलोक्यम् | त्रैलोक्य (२.१) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| निर्दहेत् | निर्दहेत् (√निः-दह् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न्य | था | तु | फ | लं | तु | भ्यं |
| भ | वे | द्घो | रा | भि | सं | हि | तम् |
| क्रो | धे | न | हि | पि | ता | मे | ऽसौ |
| त्रै | लो | क्य | म | पि | नि | र्द | हेत् |