पदच्छेदः
| गुरुः | गुरु (१.१) |
| पिता | पितृ (१.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| राजेन्द्र | राजन्–इन्द्र (८.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| शिष्यो | शिष्य (१.१) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
| व्यसनं | व्यसन (२.१) |
| सुमहत् | सु (अव्ययः)–महत् (२.१) |
| क्रुद्धः | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| स | तद् (१.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| दद्यान्महातपाः | दद्यात् (√दा विधिलिङ् प्र.पु. एक.)–महत्–तपस् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गु | रुः | पि | ता | मे | रा | जे | न्द्र |
| त्वं | च | शि | ष्यो | म | हा | त्म | नः |
| व्य | स | नं | सु | म | ह | त्क्रु | द्धः |
| स | ते | द | द्या | न्म | हा | त | पाः |