M N Dutt
He was pious, grateful and used to perform nothing without proper deliberation. And treading tracks he used to govern his subjects very carefully.
पदच्छेदः
| धर्मज्ञश्च | धर्म–ज्ञ (१.१)–च (अव्ययः) |
| कृतज्ञश्च | कृतज्ञ (१.१)–च (अव्ययः) |
| बुद्ध्या | बुद्धि (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| परिनिष्ठितः | परिनिष्ठित (√परिनि-स्था + क्त, १.१) |
| शशास | शशास (√शास् लिट् प्र.पु. एक.) |
| पृथिवीं | पृथिवी (२.१) |
| सर्वां | सर्व (२.१) |
| धर्मेण | धर्म (३.१) |
| सुसमाहितः | सु (अव्ययः)–समाहित (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ध | र्म | ज्ञ | श्च | कृ | त | ज्ञ | श्च |
| बु | द्ध्या | च | प | रि | नि | ष्ठि | तः |
| श | शा | स | पृ | थि | वीं | स | र्वां |
| ध | र्मे | ण | सु | स | मा | हि | तः |