M N Dutt
Hearing the words of Rāghava, Lakşmaņa, the enhancer of Sumitra's delight, again took up that theme.पदच्छेदः
| राघवेणैवम् | राघव (३.१)–एवम् (अव्ययः) |
| उक्तस्तु | उक्त (√वच् + क्त, १.१)–तु (अव्ययः) |
| सुमित्रानन्दवर्धनः | सुमित्रा–आनन्द–वर्धन (१.१) |
| भूय | भूयस् (अव्ययः) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| कथां | कथा (२.१) |
| दिव्यां | दिव्य (२.१) |
| कथयामास | कथयामास (√कथय् प्र.पु. एक.) |
| लक्ष्मणः | लक्ष्मण (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | घ | वे | णै | व | मु | क्त | स्तु |
| सु | मि | त्रा | न | न्द | व | र्ध | नः |
| भू | य | ए | व | क | थां | दि | व्यां |
| क | थ | या | मा | स | ल | क्ष्म | णः |