पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| यज्ञसमाप्तौ | यज्ञ–समाप्ति (७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| ब्रह्महत्या | ब्रह्महत्या (१.१) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
| अभिगम्याब्रवीद् | अभिगम्य (√अभि-गम् + ल्यप्)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| क्व | क्व (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| स्थानं | स्थान (२.१) |
| विधास्यथ | विधास्यथ (√वि-धा लृट् म.पु. द्वि.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | य | ज्ञ | स | मा | प्तौ | तु |
| ब्र | ह्म | ह | त्या | म | हा | त्म | नः |
| अ | भि | ग | म्या | ब्र | वी | द्वा | क्यं |
| क्व | मे | स्था | नं | वि | धा | स्य | थ |