M N Dutt
In this wise, the celestials being stricken with anxiety, according to the previous command of Visnu, engaged in celebrating the sacrifice.
पदच्छेदः
| क्षीयमाणे | क्षीयमाण (√क्षि + शानच्, ७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| लोके | लोक (७.१) |
| ऽस्मिन् | इदम् (७.१) |
| संभ्रान्तमनसः | संभ्रान्त (√सम्-भ्रम् + क्त)–मनस् (१.३) |
| सुराः | सुर (१.३) |
| यद् | यद् (१.१) |
| उक्तं | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| विष्णुना | विष्णु (३.१) |
| पूर्वं | पूर्वम् (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| यज्ञं | यज्ञ (२.१) |
| समुपानयन् | समुपानयन् (√समुप-नी लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| क्षी | य | मा | णे | तु | लो | के | ऽस्मि |
| न्सं | भ्रा | न्त | म | न | सः | सु | राः |
| य | दु | क्तं | वि | ष्णु | ना | पू | र्वं |
| तं | य | ज्ञं | स | मु | पा | न | यन् |