पदच्छेदः
| निःस्रोतसश्चाम्बुवाहा | निःस्रोतस् (१.३)–च (अव्ययः)–अम्बु–वाह (१.३) |
| ह्रदाश्च | ह्रद (१.३)–च (अव्ययः) |
| सरितस्तथा | सरित् (१.३)–तथा (अव्ययः) |
| संक्षोभश्चैव | संक्षोभ (१.१)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| सत्त्वानाम् | सत्त्व (६.३) |
| अनावृष्टिकृतो | अनावृष्टि–कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| ऽभवत् | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| निः | स्रो | त | स | श्चा | म्बु | वा | हा |
| ह्र | दा | श्च | स | रि | त | स्त | था |
| सं | क्षो | भ | श्चै | व | स | त्त्वा | ना |
| म | ना | वृ | ष्टि | कृ | तो | ऽभ | वत् |