पदच्छेदः
| ये | यद् (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| महात्मानो | महात्मन् (१.३) |
| मुनयश्चिरजीविनः | मुनि (१.३)–चिर–जीविन् (१.३) |
| नास्मरंस्तादृशं | न (अव्ययः)–अस्मरन् (√स्मृ लङ् प्र.पु. बहु.)–तादृश (२.१) |
| यज्ञं | यज्ञ (२.१) |
| दानौघसमलंकृतम् | दान–ओघ–समलंकृत (√समलं-कृ + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ये | च | त | त्र | म | हा | त्मा | नो |
| मु | न | य | श्चि | र | जी | वि | नः |
| ना | स्म | रं | स्ता | दृ | शं | य | ज्ञं |
| दा | नौ | घ | स | म | लं | कृ | तम् |