पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| कश्चिन्मलिनस्तत्र | कश्चित् (१.१)–मलिन (१.१)–तत्र (अव्ययः) |
| दीनो | दीन (१.१) |
| वाप्यथ | वा (अव्ययः)–अपि (अव्ययः)–अथ (अव्ययः) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| कृशः | कृश (१.१) |
| तस्मिन् | तद् (७.१) |
| यज्ञवरे | यज्ञ–वर (७.१) |
| राज्ञो | राजन् (६.१) |
| हृष्टपुष्टजनावृते | हृष्ट (√हृष् + क्त)–पुष्ट (√पुष् + क्त)–जन–आवृत (√आ-वृ + क्त, ७.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | क | श्चि | न्म | लि | न | स्त | त्र |
| दी | नो | वा | प्य | थ | वा | कृ | शः |
| त | स्मि | न्य | ज्ञ | व | रे | रा | ज्ञो |
| हृ | ष्ट | पु | ष्ट | ज | ना | वृ | ते |