पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| शिष्यावब्रवीद्धृष्टो | शिष्य (२.२)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.)–हृष्ट (√हृष् + क्त, १.१) |
| युवां | त्वद् (१.२) |
| गत्वा | गत्वा (√गम् + क्त्वा) |
| समाहितौ | समाहित (१.२) |
| कृत्स्नं | कृत्स्न (१.१) |
| रामायणं | रामायण (१.१) |
| काव्यं | काव्य (१.१) |
| गायतां | गायताम् (√गा लोट् प्र.पु. द्वि.) |
| परया | पर (३.१) |
| मुदा | मुद् (३.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | शि | ष्या | व | ब्र | वी | द्धृ | ष्टो |
| यु | वां | ग | त्वा | स | मा | हि | तौ |
| कृ | त्स्नं | रा | मा | य | णं | का | व्यं |
| गा | य | तां | प | र | या | मु | दा |