पदच्छेदः
| रामस्य | राम (६.१) |
| भवनद्वारि | भवन–द्वार् (७.१) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| कर्म | कर्मन् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| वर्तते | वर्तते (√वृत् लट् प्र.पु. एक.) |
| ऋत्विजाम् | ऋत्विज् (६.३) |
| अग्रतश्चैव | अग्रतस् (अव्ययः)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| गेयं | गेय (√गा + कृत्, १.१) |
| विशेषतः | विशेषतः (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | म | स्य | भ | व | न | द्वा | रि |
| य | त्र | क | र्म | च | व | र्त | ते |
| ऋ | त्वि | जा | म | ग्र | त | श्चै | व |
| त | त्र | गे | यं | वि | शे | ष | तः |