पदच्छेदः
| दीयमानं | दीयमान (√दा + शानच्, २.१) |
| सुवर्णं | सुवर्ण (२.१) |
| तन्नागृह्णीतां | तद् (२.१)–न (अव्ययः)–अगृह्णीताम् (√ग्रह् लङ् प्र.पु. द्वि.) |
| कुशीलवौ | कुशीलव (१.२) |
| ऊचतुश्च | ऊचतुः (√वच् लिट् प्र.पु. द्वि.)–च (अव्ययः) |
| महात्मानौ | महात्मन् (१.२) |
| किम् | क (१.१) |
| अनेनेति | इदम् (३.१)–इति (अव्ययः) |
| विस्मितौ | विस्मित (√वि-स्मि + क्त, १.२) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दी | य | मा | नं | सु | व | र्णं | त |
| न्ना | गृ | ह्णी | तां | कु | शी | ल | वौ |
| ऊ | च | तु | श्च | म | हा | त्मा | नौ |
| कि | म | ने | ने | ति | वि | स्मि | तौ |