पदच्छेदः
| वन्येन | वन्य (३.१) |
| फलमूलेन | फल–मूल (३.१) |
| निरतौ | निरत (√नि-रम् + क्त, १.२) |
| स्वो | स्वः (√अस् लट् उ.पु. एक.) |
| वनौकसौ | वनौकस् (१.२) |
| सुवर्णेन | सुवर्ण (३.१) |
| हिरण्येन | हिरण्य (३.१) |
| किं | क (२.१) |
| करिष्यावहे | करिष्यावहे (√कृ लृट् उ.पु. एक.) |
| वने | वन (७.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | न्ये | न | फ | ल | मू | ले | न |
| नि | र | तु | स्वो | व | नौ | क | सौ |
| सु | व | र्णे | न | हि | र | ण्ये | न |
| किं | क | रि | ष्या | व | हे | व | ने |