पदच्छेदः
| हृष्टा | हृष्ट (√हृष् + क्त, १.३) |
| ऋषिगणास्तत्र | ऋषि–गण (१.३)–तत्र (अव्ययः) |
| पार्थिवाश्च | पार्थिव (१.३)–च (अव्ययः) |
| महौजसः | महत्–ओजस् (१.३) |
| पिबन्त | पिबन्ते (√पा लट् प्र.पु. बहु.) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| चक्षुर्भ्यां | चक्षुस् (३.२) |
| राजानं | राजन् (२.१) |
| गायकौ | गायक (२.२) |
| च | च (अव्ययः) |
| तौ | तद् (२.२) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हृ | ष्टा | ऋ | षि | ग | णा | स्त | त्र |
| पा | र्थि | वा | श्च | म | हौ | ज | सः |
| पि | ब | न्त | इ | व | च | क्षु | र्भ्यां |
| रा | जा | नं | गा | य | कौ | च | तौ |