पदच्छेदः
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| राघवस्यैतद् | राघव (६.१)–एतद् (२.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| परमम् | परम (२.१) |
| अद्भुतम् | अद्भुत (२.१) |
| दूताः | दूत (१.३) |
| सम्प्रययुर् | सम्प्रययुः (√सम्प्र-या लिट् प्र.पु. बहु.) |
| वाटं | वाट (२.१) |
| यत्रास्ते | यत्र (अव्ययः)–आस्ते (√आस् लट् प्र.पु. एक.) |
| मुनिपुंगवः | मुनि–पुंगव (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्रु | त्वा | तु | रा | घ | व | स्यै | त |
| द्व | चः | प | र | म | म | द्भु | तम् |
| दू | ताः | सं | प्र | य | यु | र्वा | टं |
| य | त्रा | स्ते | मु | नि | पुं | ग | वः |