M N Dutt
Hearing the words of Rānia, messengers went to Vālmīki and saluting the high-souled (ascetic) burning in his effulgence and of incomparable lustre, communicated to him, in sweet words all what Rāma had said.
पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| प्रणम्य | प्रणम्य (√प्र-नम् + ल्यप्) |
| महात्मानं | महात्मन् (२.१) |
| ज्वलन्तम् | ज्वलत् (√ज्वल् + शतृ, २.१) |
| अमितप्रभम् | अमित–प्रभा (२.१) |
| ऊचुस्ते | ऊचुः (√वच् लिट् प्र.पु. बहु.)–तद् (१.३) |
| रामवाक्यानि | राम–वाक्य (२.३) |
| मृदूनि | मृदु (२.३) |
| मधुराणि | मधुर (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | प्र | ण | म्य | म | हा | त्मा | नं |
| ज्व | ल | न्त | म | मि | त | प्र | भम् |
| ऊ | चु | स्ते | रा | म | वा | क्या | नि |
| मृ | दू | नि | म | धु | रा | णि | च |