हतेषु तेषु वीरेषु भरतः कैकयीसुतः ।
निवेशयामास तदा समृद्धे द्वे पुरोत्तमे ।
तक्षं तक्षशिलायां तु पुष्करं पुष्करावतौ ॥
हतेषु तेषु वीरेषु भरतः कैकयीसुतः ।
निवेशयामास तदा समृद्धे द्वे पुरोत्तमे ।
तक्षं तक्षशिलायां तु पुष्करं पुष्करावतौ ॥
पदच्छेदः
| हतेषु | हत (√हन् + क्त, ७.३) |
| तेषु | तद् (७.३) |
| वीरेषु | वीर (७.३) |
| भरतः | भरत (१.१) |
| कैकयीसुतः | कैकयी–सुत (१.१) |
| निवेशयामास | निवेशयामास (√नि-वेशय् प्र.पु. एक.) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| समृद्धे | समृद्ध (√सम्-ऋध् + क्त, २.२) |
| द्वे | द्वि (२.२) |
| पुरोत्तमे | पुर–उत्तम (२.२) |
| तक्षं | तक्ष (२.१) |
| तक्षशिलायां | तक्षशिला (७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| पुष्करं | पुष्कर (२.१) |
| पुष्करावतौ | पुष्करावती (७.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | ते | षु | ते | षु | वी | रे | षु | भ | र | तः | कै |
| क | यी | सु | तः | नि | वे | श | या | मा | स | त | दा |
| स | मृ | द्धे | द्वे | पु | रो | त्त | मे | त | क्षं | त | क्ष |
| शि | ला | यां | तु | पु | ष्क | रं | पु | ष्क | रा | व | तौ |