M N Dutt
Rāma approved of the words of Bharata and having brought the country of Kārupatha under his subjection gave it to Angada.
पदच्छेदः
| तद् | तद् (२.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| भरतेनोक्तं | भरत (३.१)–उक्त (√वच् + क्त, २.१) |
| प्रतिजग्राह | प्रतिजग्राह (√प्रति-ग्रह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| राघवः | राघव (१.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| वशे | वश (७.१) |
| देशम् | देश (२.१) |
| अङ्गदस्य | अङ्गद (६.१) |
| न्यवेशयत् | न्यवेशयत् (√नि-वेशय् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | द्वा | क्यं | भ | र | ते | नो | क्तं |
| प्र | ति | ज | ग्रा | ह | रा | घ | वः |
| तं | च | कृ | त्वा | व | शे | दे | श |
| म | ङ्ग | द | स्य | न्य | वे | श | यत् |