पदच्छेदः
| अभिषिच्य | अभिषिच्य (√अभि-सिच् + ल्यप्) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तौ | तद् (२.२) |
| वीरौ | वीर (२.२) |
| प्रस्थाप्य | प्रस्थाप्य (√प्र-स्थापय् + ल्यप्) |
| स्वपुरे | स्व–पुर (७.१) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| दूतान् | दूत (२.३) |
| संप्रेषयामास | संप्रेषयामास (√संप्र-इषय् प्र.पु. एक.) |
| शत्रुघ्नाय | शत्रुघ्न (४.१) |
| महात्मने | महात्मन् (४.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | भि | षि | च्य | तु | तौ | वी | रौ |
| प्र | स्था | प्य | स्व | पु | रे | त | था |
| दू | ता | न्सं | प्रे | ष | या | मा | स |
| श | त्रु | घ्ना | य | म | हा | त्म | ने |