तथैवमुक्त्वा काकुत्स्थः सर्वांस्तानृक्षवानरान् ।
मया सार्धं प्रयातेति तदा तान्राघवोऽब्रवीत् ॥
तथैवमुक्त्वा काकुत्स्थः सर्वांस्तानृक्षवानरान् ।
मया सार्धं प्रयातेति तदा तान्राघवोऽब्रवीत् ॥
M N Dutt
Having thus addressed them all Kākuthstha said to bears and monkeys. Do you come all with me.पदच्छेदः
| तथैवम् | तथा (अव्ययः)–एवम् (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| काकुत्स्थः | काकुत्स्थ (१.१) |
| सर्वांस्तान् | सर्व (२.३)–तद् (२.३) |
| ऋक्षवानरान् | ऋक्ष–वानर (२.३) |
| मया | मद् (३.१) |
| सार्धं | सार्धम् (अव्ययः) |
| प्रयातेति | प्रयाता (√प्र-या लुट् प्र.पु. एक.)–इति (अव्ययः) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| तान् | तद् (२.३) |
| राघवो | राघव (१.१) |
| ऽब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | थै | व | मु | क्त्वा | का | कु | त्स्थः |
| स | र्वां | स्ता | नृ | क्ष | वा | न | रान् |
| म | या | सा | र्धं | प्र | या | ते | ति |
| त | दा | ता | न्रा | घ | वो | ऽब्र | वीत् |