पदच्छेदः
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| सर्वं | सर्व (२.१) |
| निवेद्याशु | निवेद्य (√नि-वेदय् + ल्यप्)–आशु (अव्ययः) |
| शत्रुघ्नाय | शत्रुघ्न (४.१) |
| महात्मने | महात्मन् (४.१) |
| विरेमुस्ते | विरेमुः (√वि-रम् लिट् प्र.पु. बहु.)–तद् (१.३) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| दूतास्त्वर | दूत (१.३)–त्वर (√त्वर् लोट् म.पु. ) |
| राजन्न् | राजन् (८.१) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| ब्रुवन् | ब्रुवन् (√ब्रू लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | वं | स | र्वं | नि | वे | द्या | शु |
| श | त्रु | घ्ना | य | म | हा | त्म | ने |
| वि | रे | मु | स्ते | त | तो | दू | ता |
| स्त्व | र | रा | ज | न्नि | ति | ब्रु | वन् |