अन्वयः
AI
शुद्धिमति तत् अन्वये क्षीरनिधौ इन्दुः इव शुद्धिमत्तरः दिलीपः इति राजेन्दुः प्रसूतः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तदन्वय इति॥ शुद्धिरस्यास्तीति शुद्धिमान्। तस्मिन् शुद्धिरस्यास्तीति शुद्धिमान्। तस्मिन् शुद्धिमति तदन्वये तस्य मनोरन्वये कुले ।
अन्ववायोऽन्वयो वंशो गोत्रं चाभिजनं कुलम् इति हलायुधः। अतिशयेन शुद्धिमान् शुद्धिमत्तरः। द्विवचनविभज्योप- (अष्टाध्यायी ५.३.५७ ) इत्यादिना तरप्प्रत्ययः। दिलीप इति प्रसिद्धो राजा इन्दुरिव राजेन्दू राजश्रेष्ठः। उपमितं व्याघ्रादिना समासः। क्षीरनिधाविन्दुरिव प्रसूतो जातः॥
Summary
AI
In that pure lineage was born Dilīpa, a moon among kings and even purer than his race, just as the moon emerged from the primordial Ocean of Milk.
सारांश
AI
उस अत्यंत पवित्र वंश में राजाओं में श्रेष्ठ दिलीप उत्पन्न हुए, जो वैसे ही निष्कलंक थे जैसे क्षीरसागर से चंद्रमा प्रकट होता है।
पदच्छेदः
AI
| तदन्वये | तद्–अन्वय (७.१) | in that lineage |
| शुद्धिमति | शुद्धि (+मतुप्, ७.१) | in the pure |
| प्रसूतः | प्रसूत (प्र√सू+क्त, १.१) | was born |
| शुद्धिमत्तरः | शुद्धि (+मतुप्+तरप्, १.१) | purer still |
| दिलीपः | दिलीप (१.१) | Dilīpa |
| इति | इति | thus |
| राजेन्दुः | राजन्–इन्दु (१.१) | moon among kings |
| इन्दुः | इन्दु (१.१) | the moon |
| क्षीरनिधौ | क्षीर–निधि (७.१) | in the Milky Ocean |
| इव | इव | like |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द | न्व | ये | शु | द्धि | म | ति |
| प्र | सू | तः | शु | द्धि | म | त्त | रः |
| दि | ली | प | इ | ति | रा | जे | न्दु |
| रि | न्दुः | क्षी | र | नि | धा | वि | व |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.