अन्वयः
AI
वसुधाधिपः महति अवरोधे अपि तया मनस्विन्या लक्ष्म्या च आत्मानम् कलत्रवन्तम् मेने।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कलत्रवन्तमिति॥ वसुधाधिपः। अवरोधेऽन्तः पुरवर्गे महति सत्यपि। मनस्विन्या दृढचित्तया। पतिचित्तानुवृत्त्यादिनिर्बन्धक्षमयेत्यर्थथः। तया सुदक्षिणया लक्ष्म्या चात्मानं कलत्रवन्तं भार्यावन्तं मेने।
कलत्रं श्रोणिभार्ययोः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.१८७ ) । वसुधाधिप इत्यनेन वसुधया चेचि गम्यते ॥
Summary
AI
Though he had a large harem, the lord of the earth considered himself truly having a wife only through that high-minded queen and through the Goddess Lakṣmī.
सारांश
AI
विशाल अंतःपुर के होने पर भी, वह तेजस्वी राजा उस बुद्धिमती पत्नी और राज्यलक्ष्मी के कारण ही स्वयं को वास्तव में पत्नीवान मानते थे।
पदच्छेदः
AI
| वसुधाधिपः | वसुधा–अधिप (१.१) | the lord of the earth |
| महति | महत् (७.१) | in the great |
| अवरोधे | अवरोध (७.१) | harem |
| अपि | अपि | even |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| मनस्विन्या | मनस्विन् (३.१) | by the high-minded one |
| लक्ष्म्या | लक्ष्मी (३.१) | by the goddess of fortune |
| च | च | and |
| आत्मानम् | आत्मन् (२.१) | himself |
| कलत्रवन्तम् | कलत्र (+वतुप्, २.१) | possessed of a wife |
| मेने | मेने (√मन् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | considered |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | ल | त्र | व | न्त | मा | त्मा | न |
| म | व | रो | धे | म | ह | त्य | पि |
| त | या | मे | ने | म | न | स्वि | न्या |
| ल | क्ष्म्या | च | व | सु | धा | धि | पः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.