संतानार्थाय विधये स्वभुजादवतारिता ।
तेन धूर्जगतो गुर्वी सचिवेषु निचिक्षिपे ॥

अन्वयः AI तेन संतानार्थाय विधये स्वभुजात् अवतारिता जगतः गुर्वी धूः सचिवेषु निचिक्षिपे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) संतानेति॥ तेन दिलीपेन। संतानोऽर्थः प्रयोजनं यस्य तस्मै संतानार्थाय विधयेऽनुष्ठानाय। स्वभुजादवतारिताऽवरोपिता जगतो लोकस्य गुर्वी धूर्भारः सचिवेषु निचिक्षिपे निहिता ॥
Summary AI For the sake of performing rites to obtain progeny, he transferred the heavy burden of ruling the world from his own arms onto his ministers.
सारांश AI संतान प्राप्ति हेतु धार्मिक अनुष्ठान के लिए उन्होंने पृथ्वी के शासन का गुरुतर भार अपनी भुजाओं से उतारकर योग्य मंत्रियों को सौंप दिया।
पदच्छेदः AI
तेनतद् (३.१) by him
संतानार्थायसंतानअर्थ (४.१) for the sake of progeny
विधयेविधि (४.१) for the religious rite
स्वभुजात्स्वभुज (५.१) from his own arm
अवतारिताअवतारित (अव√तृ+क्त+टाप्, १.१) taken down
जगतःजगत् (६.१) of the world
गुर्वीगुरु (१.१) heavy
धूःधुर (१.१) yoke/burden
सचिवेषुसचिव (७.३) among the ministers
निचिक्षिपेनिचिक्षिपे (नि√क्षिप् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) was deposited
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
सं ता ना र्था वि ये
स्व भु जा ता रि ता
ते धू र्ज तो गु र्वी
चि वे षु नि चि क्षि पे
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.