सरसीष्वरविन्दानां वीचिविक्षोभशीतलम् ।
आमोदमुपजिघ्रन्तौ स्वनिःश्वासानकारिणम् ॥

अन्वयः AI सरसीषु वीचि-विक्षोभ-शीतलम् स्व-निःश्वास-अनुकारिणम् अरविन्दानाम् आमोदम् उपजिघ्रन्तौ ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) सरसीष्विति॥ सरसीषु वीचिविक्षोभशीतलमूर्मिसंघटनेन शीतलं स्वनिःश्वासमनुकर्तुं शीलमस्येति स्वनिःश्वासानुकारिणम्। एतेन तयोरुत्कृष्टस्त्रीपुंसजातीयत्वमुक्तम्। अरविन्दानामामोदमुपजिघ्रन्तौ घ्राणेन गृह्णन्तौो ॥
Summary AI During their journey, they inhaled the fragrance of lotuses from the lakes. This scent, cooled by the rippling waves, was as sweet and pleasant as their own fragrant breath.
सारांश AI वे मार्ग में सरोवरों के उन कमलों की सुगंध ले रहे थे जो लहरों के स्पर्श से शीतल थी और उनकी अपनी श्वास की सुगंध के समान सुखद थी।
पदच्छेदः AI
सरसीषुसरसी (७.३) in the lakes
अरविन्दानाम्अरविन्द (६.३) of the lotuses
वीचिविक्षोभशीतलम्वीचिविक्षोभशीतल (२.१) cooled by the agitation of the waves
आमोदम्आमोद (२.१) the fragrance
उपजिघ्रन्तौउपजिघ्रत् (उप√घ्रा+शतृ, १.२) smelling / inhaling
स्वनिःश्वासानकारिणम्स्वनिःश्वासअनुकारिन् (२.१) resembling their own breath
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
सी ष्व वि न्दा नां
वी चि वि क्षो शी लम्
मो मु जि घ्र न्तौ
स्व निः श्वा सा का रि णम्
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