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सेकान्ते मुनिकन्याभिस्तत्क्षणोज्झितवृक्षकम् ।
विश्वासाय विहंगानामालवालाम्बुपायिनाम् ॥

अन्वयः AI सेक-अन्ते मुनि-कन्याभिः तत्-क्षण-उज्झित-वृक्षकम् आलवाल-अम्बु-पायिनाम् विहंगानाम् विश्वासाय ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) सेकान्ते इति॥ सेकान्ते वृक्षमूलसेचनावसाने मुनिकन्याभिः सेक्त्रीभिः। आलवालेषु जलावापप्रदेशेषु यदम्बु तत्पायिनाम्। स्यादालवालमावालमावापः इत्यमरः (अमरकोशः १.१०.२९ ) । विहंगानां पक्षिणां विश्वासाय विश्रम्भाय। समौ विश्रम्भविश्वासौ इत्यमरः (अमरकोशः १.१०.२९ ) । तत्क्षणे सेकक्षण उज्झिता वृक्षका ह्रस्ववृक्षा यस्मिंस्तम्। ह्रस्वार्थे कप्रत्ययः ॥
Summary AI The daughters of the sages had just finished watering the saplings and moved away. This was done to give confidence to the birds, allowing them to drink freely from the water-basins without any fear.
सारांश AI मुनिकन्याओं ने वृक्षों को सींचकर उन्हें तुरंत छोड़ दिया था ताकि पक्षी निर्भय होकर क्यारियों में भरे जल को पी सकें और उनका विश्वास बना रहे।
पदच्छेदः AI
सेकान्तेसेकअन्त (७.१) at the end of watering
मुनिकन्याभिःमुनिकन्या (३.३) by the daughters of the sages
तत्क्षणोज्झितवृक्षकम्तद्क्षणउज्झित (उद्√हा+क्त)वृक्षक (२.१) where the small trees were momentarily left
विश्वासायविश्वास (४.१) for the sake of confidence
विहंगानाम्विहंग (६.३) of the birds
आलवालाम्बुपायिनाम्आलवालअम्बुपायिन् (√पा+णिन्, ६.३) who drink water from the basins
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
से का न्ते मु नि न्या भि
स्त त्क्ष णो ज्झि वृ क्ष कम्
वि श्वा सा वि हं गा ना
मा वा ला म्बु पा यि नाम्
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