अन्वयः
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अथ सः यन्तारम् 'धुर्यान् विश्रामय' इति आदिश्य ताम् पत्नीम् रथात् अवारोपयत् अवततार च ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति॥ अथाश्रमप्राप्त्यनन्तरं स राजा यन्तारं सारथिम्। धुरं वहन्तीति धुर्या युग्याः।
धुरो यड्ढकौ (अष्टाध्यायी ४.४.७७ ) इति यत्प्रत्ययः। धूर्वहे धुर्यधौरेयधुरीणाः सधुरंधराः इत्यमरः। धुर्यान् रथाश्वान् विश्रामय विनीतश्रमान्कुर्नित्यादिश्याज्ञाप्य तां पत्नीं रथादवारोहयदवतारितवान्स्वयं चावततार। विश्रमय इति ह्रस्वपाठे जनीजॄष्-, इति मित्वे १मितां ह्रस्वः इति ह्रस्वः। दीर्घपाठे मितां ह्रस्वः (अष्टाध्यायी ६.४.९२ ) इति सूत्रे वा चित्तविरागे इत्यतो वाइत्यनुवर्त्य व्यवस्थितविभाषाश्रयणत्वाद्ध्रस्वाभाव इति वृत्तकारः ॥
Summary
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The king then instructed the charioteer to rest the horses. He gently helped his wife, Sudakṣiṇā, descend from the chariot and then stepped down himself.
सारांश
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राजा दिलीप ने सारथी को घोड़ों को विश्राम देने का आदेश दिया और स्वयं रथ से उतरकर अपनी पत्नी सुदक्षिणा को भी सहारा देकर उतारा।
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | then |
| यन्तारम् | यन्तृ (२.१) | the charioteer |
| आदिश्य | आदिश्य (आ√दिश्+ल्यप्) | having commanded |
| धुर्यान् | धुर्य (२.३) | the carriage-horses |
| विश्रामय | विश्रामय (वि√श्रम् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | cause to rest |
| इति | इति | thus |
| सः | तद् (१.१) | he (Dilīpa) |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| अवारोपयत् | अवारोपयत् (अव√रुह् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | helped to descend |
| पत्नीम् | पत्नी (२.१) | the wife |
| रथात् | रथ (५.१) | from the chariot |
| अवततार | अवततार (अव√तॄ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | descended |
| च | च | and |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | य | न्ता | र | मा | दि | श्य |
| धु | र्या | न्वि | श्रा | म | ये | ति | सः |
| ता | म | वा | रो | प | य | त्प | त्नीं |
| र | था | द | व | त | ता | र | च |
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