अन्वयः
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नूनं मत्तः परं पिण्ड-विच्छेद-दर्शिनः वंश्याः स्वधा-संग्रह-तत्पराः (सन्तः) श्राद्धे न प्रकाम-भुजः (भवन्ति)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
नूनमिति॥ मत्तः परं मदनन्तरम्।
पञ्चम्यास्तसिल् (अष्टाध्यायी ५.३.७ ) । पिण्डविच्छेददर्शिनः पिण्डदानविच्छेदमुत्प्रेक्षमाणाः। वंशे भवा वंश्याः पितरः। स्वधेत्यव्ययं पितृभोज्ये वर्तते। तस्याः संग्रहे तत्परा आसक्ताः सन्तः श्राद्धे पितृकर्मणि। पितृदानं निवापः स्याच्छ्राद्धं तत्कर्म शास्त्रतः इत्यमरः (अमरकोशः २.७.३३ ) । प्रकामभुजः पर्याप्तभोजिनो न भवन्ति नूनं सत्यम्। कामं प्रकामं पर्याप्तम् इत्यमरः (अमरकोशः २.७.३३ ) । निर्धना ह्यापद्धनं कियदपि संगृह्णन्तीति भावः ॥
Summary
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Surely my ancestors, foreseeing the cessation of funeral offerings after me, do not eat their fill at the śrāddha ceremony, being anxious about preserving the svadhā offerings.
सारांश
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मेरे पूर्वज मेरे बाद वंश समाप्त होता देख रहे हैं, इसलिए वे श्राद्ध के समय दिए गए अन्न को पूरी तृप्ति के साथ ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं।
पदच्छेदः
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| नूनम् | नूनम् | surely |
| मत्तः | अस्मद् (+तसिल्) | after me |
| परम् | परम् | beyond |
| वंश्याः | वंश (+यत्, १.३) | ancestors |
| पिण्डविच्छेददर्शिनः | पिण्ड–विच्छेद (वि√छिद्+घञ्)–दर्शिन् (√दृश्+णिनि, १.३) | foreseeing the cessation of offerings |
| न | न | not |
| प्रकामभुजः | प्रकाम–भुज् (+क्विप्, १.३) | eating to their heart's content |
| श्राद्धे | श्राद्ध (७.१) | in the funeral ceremony |
| स्वधासंग्रहतत्पराः | स्वधा–संग्रह (सम्√ग्रह्+घञ्)–तत्पर (१.३) | anxious about the collection of offerings |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नू | नं | म | त्तः | प | रं | वं | श्याः |
| पि | ण्ड | वि | च्छे | द | द | र्शि | नः |
| न | प्र | का | म | भु | जः | श्रा | द्धे |
| स्व | धा | सं | ग्र | ह | त | त्प | राः |
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