Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

ईप्सितं तदवज्ञानाद्विद्धि सार्गलमात्मनः ।
प्रतिबध्नाति हि श्रेयः पूज्यपूजाव्यतिक्रमः ॥

अन्वयः AI तत्-अवज्ञानात् आत्मनः ईप्सितं स-अर्गलम् विद्धि, हि पूज्य-पूजा-व्यतिक्रमः श्रेयः प्रतिबध्नाति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) ईप्सितमिति॥ तदवज्ञानात्तस्या धेनोरवज्ञानादपमानादात्मनः स्वस्याप्तुमिष्टमीप्सितं मनोरथम्। आप्ने तेः सन्नन्तात् क्तः, ईकारश्च। सार्गलं सप्रतिबन्धं विद्धि जानीहि। तथा हि-पूज्यपूजाया व्यतिक्रमोऽतिक्रमणं श्रेयः प्रतिबध्नाति ॥
Summary AI Know that your desire is barred because of that disrespect; for an omission in the worship of those worthy of worship obstructs one's welfare.
सारांश AI अपनी इच्छा की पूर्ति में आने वाली बाधा को उस अनादर का परिणाम समझो, क्योंकि पूजनीय जनों के सत्कार में हुई उपेक्षा सौभाग्य को रोक देती है।
पदच्छेदः AI
ईप्सितम्ईप्सित (√आप्+सन्+क्त, २.१) desired object
तदवज्ञानात्तद्अवज्ञान (५.१) due to the disregard of her
विद्धिविद्धि (√विद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) know
सार्गलम्अर्गल (२.१) obstructed (with a bolt)
आत्मनःआत्मन् (६.१) your own
प्रतिबध्नातिप्रतिबध्नाति (प्रति√बन्ध् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) obstructs
हिहि for/indeed
श्रेयःश्रेयस् (२.१) well-being/prosperity
पूज्यपूजाव्यतिक्रमःपूज्यपूजाव्यतिक्रम (१.१) transgression in the worship of the worshipful
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
प्सि तं ज्ञा ना
द्वि द्धि सा र्ग मा त्म नः
प्र ति ध्ना ति हि श्रे यः
पू ज्य पू जा व्य ति क्र मः
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.