अन्वयः
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शैशवे अभ्यस्तविद्यानाम् यौवने विषयैषिणाम् वार्धके मुनिवृत्तीनाम् अन्ते योगेन तनुत्यजाम् (रघूणाम् अन्वयम् वक्ष्ये) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
शैशव इति॥ शिशोर्भावः शैशवं बाल्यम्।
प्राणभृज्जातिवयोवचनोद्गात्र- (अष्टाध्यायी ५.१.१२९ ) इत्यञ्प्रत्ययः। शिशुत्वं शैशवं बाल्यम् इत्यमरः (अमरकोशः २.६.४० ) । तस्मिन्वयसि, अभ्यस्तविद्यानाम्। एतेन ब्रह्मचर्याश्रमो विवक्षितः। यूनो भावो यौवनं तारुण्यम्। युवादित्वादण्प्रत्ययः । तारुण्यं यौवनं समे इत्यमरः (अमरकोशः २.६.४० ) । तंस्मिन्वयसि विषयैषिणां भोगाभिलाषिणाम्। एतेन गृहस्थाश्रमो विवक्षितः। वृद्धस्य भावो वार्धकं वृद्धत्वम्। द्वन्द्वमनोज्ञादिभ्यश्च (अष्टाध्यायी ५.१.१३३ ) इति वुञ्प्रत्ययः। वृद्धस्य भावो वार्धकं वृद्धत्वम्। वार्धकं वृद्धसंघाते वृद्धत्वे वृद्धकर्मणि इति विश्वः। संघातार्थेऽत्र वृद्धाञ्च इति वक्तव्यात्सामूहिको वुञ्। तस्मिन् वार्धके वयसि मुनिनां वृत्तिरिव वृत्तिर्येषां तेषाम्। एतेन वानप्रस्थाश्रमो विवक्षितः। अन्ते शरीरत्यागकाले योगेन परमात्मध्यानेन। योगः संनहनोपायध्यानसंगतियुक्तिषु इत्यमरः (अमरकोशः २.६.४० ) । तनुं देहं त्यजन्तीति तनुत्यजः, कायो देहः क्लीबपुंसोः स्त्त्रियां मूर्तिस्तनुस्तनूः इत्यमरः (अमरकोशः २.६.४० ) । तनुत्यजां देहत्यागिनाम्। अन्येभ्योऽपि दृश्यते (अष्टाध्यायी ३.२.१७८ ) इति क्विप्। एतेन मोक्षभावो विवक्षितः ॥
Summary
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They mastered all branches of knowledge in childhood, enjoyed worldly pleasures in youth, adopted the ascetic life of sages in old age, and finally cast off their physical bodies through the practice of Yoga.
सारांश
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जिन्होंने बचपन में विद्याभ्यास किया, युवावस्था में सुख भोगे, वृद्धावस्था में मुनियों जैसा जीवन जिया और अंत में योग द्वारा देह त्याग किया।
पदच्छेदः
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| शैशवे | शैशव (७.१) | in childhood |
| अभ्यस्तविद्यानाम् | अभि–अभ्यस्त (√अस्+क्त)–विद्या (६.३) | who studied sciences |
| यौवने | यौवन (७.१) | in youth |
| विषयैषिणाम् | विषय–एषिन् (√इष्+इन्, ६.३) | who sought pleasures |
| वार्धके | वार्धक (७.१) | in old age |
| मुनिवृत्तीनाम् | मुनि–वृत्ति (६.३) | who lived like ascetics |
| योगेन | योग (३.१) | through yoga |
| अन्ते | अन्त (७.१) | at the end |
| तनुत्यजाम् | तनु–त्यज् (√त्यज्+क्विप्, ६.३) | who abandoned their bodies |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शै | श | वे | ऽभ्य | स्त | वि | द्या | नां |
| यौ | व | ने | वि | ष | यै | षि | णाम् |
| वा | र्ध | के | मु | नि | वृ | त्ती | नां |
| यो | गे | ना | न्ते | त | नु | त्य | जाम् |
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