अन्वयः
AI
देश-काल-ज्ञः स-परिग्रहः प्रीति-मान् आनतः शिष्यः शासितुः आदेशम् तथा इति प्रतिजग्राह ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तथेति॥ देशकालज्ञः देशोऽग्निसंनिधिः। कालोऽग्निहोत्रावसानसमयः, विशिष्टदेशकालोत्पन्नमार्षं ज्ञानमव्याहतमिति जानन्। अत एव प्रीतिमान् शिष्योऽन्तेवासी राजा सपरिग्रहः सपत्नीकः।
पत्नीपरिजनादानमूलशापाः परिग्रहाः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.२५२ ) । आनतो विनयनम्रः सन्। शासितुर्गुरोरादेशमाज्ञां तथेति प्रतिजग्राह स्वीचकार॥
Summary
AI
Being joyful and accompanied by his wife, the bowing disciple, knowing time and place, accepted the teacher's command, saying, "So be it."
सारांश
AI
उचित समय और स्थान को जानने वाले राजा दिलीप ने अपनी पत्नी सहित गुरु की आज्ञा को अत्यंत श्रद्धा और हर्ष के साथ सिर झुकाकर स्वीकार किया।
पदच्छेदः
AI
| तथा | तथा | so be it |
| इति | इति | thus |
| प्रतिजग्राह | प्रतिजग्राह (प्रति√ग्रह कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | accepted |
| प्रीतिमान् | प्रीति (+मतुप्, १.१) | joyful |
| सपरिग्रहः | सह–परिग्रह (परि√ग्रह+अप्, १.१) | along with his wife |
| आदेशम् | आदेश (आ√दिश्+घञ्, २.१) | the command |
| देशकालज्ञः | देश–काल–ज्ञा (+क, १.१) | knower of place and time |
| शिष्यः | शिष् (+क्यप्, १.१) | the disciple |
| शासितुः | शासितृ (√शास्+तृच्, ६.१) | of the teacher |
| आनतः | आनत (आ√नम्+क्त, १.१) | bowed |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | थे | ति | प्र | ति | ज | ग्रा | ह |
| प्री | ति | मा | न्स | प | रि | ग्र | हः |
| आ | दे | शं | दे | श | का | ल | ज्ञः |
| शि | ष्यः | शा | सि | तु | रा | न | तः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.