अन्वयः
AI
ते अवाप्तव्यम् अनवाप्तम् किञ्चन न विद्यते। लोकानुग्रहः एव एकः ते जन्मकर्मणोः हेतुः (अस्ति)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अनवाप्तमिति॥ अनवाप्तमप्राप्तम्। अवाप्तव्यं प्राप्तव्यं ते तव किंचन किंचिदपि न विद्यते। नित्यपरिपूर्णत्वादिति भावः। तर्हि किंनिबन्धने जन्मकर्मणी तत्राह-लोकेति। एको लोकानुग्रह एव ते तव जन्मकर्मणोर्हेतुः। परमकारुणिकस्य ते परार्थैव प्रवृत्तिः, न स्वार्थेत्यर्थः ॥
Summary
AI
There is nothing unattained that You need to attain. The sole reason for Your birth and actions is the benevolent grace You bestow upon the world.
सारांश
AI
आपके लिए ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे प्राप्त करना शेष हो, फिर भी आपके जन्म और कर्मों का एकमात्र उद्देश्य संसार पर अनुग्रह करना ही है।
पदच्छेदः
AI
| अनवाप्तम् | अनवाप्त (१.१) | unattained |
| अवाप्तव्यम् | अवाप्तव्य (१.१) | worth attaining |
| न | न | not |
| ते | युष्मद् (४.१) | for You |
| किञ्चन | किञ्चन | anything |
| विद्यते | विद्यते (√विद् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | exists |
| लोकानुग्रहः | लोक–अनुग्रह (१.१) | grace upon the world |
| एव | एव | alone |
| एकः | एक (१.१) | the one |
| हेतुः | हेतु (१.१) | reason |
| ते | युष्मद् (६.१) | Your |
| जन्मकर्मणोः | जन्म–कर्मन् (६.२) | of birth and actions |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न | वा | प्त | म | वा | प्त | यं |
| न | ते | किं | च | न | वि | द्य | ते |
| लो | का | नु | ग्र | ह | ए | वै | को |
| हे | तु | स्ते | ज | न्म | क | र्म | णोः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.