अथ वेलासमासन्नशैलरन्ध्रानुनादिना ।
स्वरेणोवाच भगवान् परिभूतार्णवध्वनिः ॥

अन्वयः AI अथ भगवान् परिभूतार्णवध्वनिः वेलासमासन्नशैलरन्ध्रानुनादिना स्वरेण उवाच।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) अथेति॥ अथ वेलायामब्धिकूले समासन्नानां संनिकृष्टानां शैलानां रन्ध्रेषु गह्वरेष्वनुनादिना प्रतिध्वनिमता स्वरेण परिभूतार्णवध्वनिस्तिरस्कृतसमुद्रघोषो भगवानुवाच ॥
Summary AI Then, the Lord, whose voice surpassed the roar of the ocean, spoke with a tone that resounded through the caves of the mountains near the shore.
सारांश AI इसके पश्चात भगवान ने समुद्र की गर्जना को भी मात देने वाली अपनी गंभीर वाणी में कहा, जो तट के समीप स्थित पर्वतों की कंदराओं में प्रतिध्वनित हो रही थी।
पदच्छेदः AI
अथअथ then
वेलासमासन्नशैलरन्ध्रानुनादिनावेलासमासन्नशैलरन्ध्रअनुनादिन् (३.१) by the (voice) that resounded through the caves of the mountains near the shore
स्वरेणस्वर (३.१) with a voice
उवाचउवाच (√वच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) spoke
भगवान्भगवत् (१.१) the Lord
परिभूतार्णवध्वनिःपरिभूतअर्णवध्वनि (१.१) He whose voice surpassed the ocean's roar
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
वे ला मा न्न
शै न्ध्रा नु ना दि ना
स्व रे णो वा वा
न्प रि भू ता र्ण ध्व निः
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