अन्वयः
AI
तस्य सन्तान-काङ्क्षिणः जित-आत्मानः सन्तः ऋष्यश्रृङ्ग-आदयः ऋत्विजः पुत्रीयाम् इष्टिम् आरेभिरे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
ऋष्यशृङ्गेति॥ ऋष्यशृङ्गादयः। ऋष्यशृङ्गो नाम कश्चिदृषिः। तदादयः। ऋतुमृतौ वा यजन्तीत्यृत्विजो याज्ञिकाः।
ऋत्विग्दधऋक्- (अष्टाध्यायी ३.२.५९ ) इत्यादिना क्विबन्तो निपातः। जितात्मानो जितान्तःकरणाः सन्तः संतानकाङ्क्षिणः पुत्रार्थिनस्तस्य दशरथस्य पुत्रीयां पुत्रनिमित्ताम्। पुत्राच्छ च (अष्टाध्यायी ५.१.४० ) इति छप्रत्ययः। इष्टिं यागमारेभिरे प्रचकमिरे ॥
Summary
AI
The self-controlled and virtuous priests led by Rishyashringa, who were desirous of progeny for the king, commenced the Putriya Ishti, a sacrifice for obtaining a son.
सारांश
AI
राजा की पुत्र प्राप्ति की इच्छा को जानकर ऋष्यशृंग आदि संयमी ऋषियों ने उनके लिए विधिपूर्वक पुत्रेष्टि यज्ञ का अनुष्ठान प्रारंभ किया।
पदच्छेदः
AI
| ऋष्यश्रृङ्गादयः | ऋष्यश्रृङ्ग–आदि (१.३) | Rishyashringa and others |
| तस्य | तद् (६.१) | for him |
| सन्तः | सत् (√अस्+शतृ, १.३) | being virtuous |
| सन्तानकाङ्क्षिणः | सन्तान–काङ्क्षिन् (१.३) | desirous of progeny |
| आरेभिरे | आरेभिरे (आ√रभ् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | commenced |
| जितात्मानः | जित–आत्मन् (१.३) | self-controlled ones |
| पुत्रीयाम् | पुत्रीया (२.१) | the Putriya |
| इष्टिम् | इष्टि (२.१) | sacrifice |
| ऋत्विजः | ऋत्विज् (१.३) | the priests |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऋ | ष्य | श्रृ | ङ्गा | द | य | स्त | स्य |
| स | न्तः | स | न्ता | न | का | ङ्क्षि | णः |
| आ | रे | भि | रे | जि | ता | त्मा | नः |
| पु | त्री | या | मि | ष्टि | मृ | त्वि | जः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.